कोतवाली पटेल नगर क्षेत्र के अंतर्गत एस्टेट रामगढ़ शिमला बाईपास पर स्थित दून युधिष्ठिर पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में निदेशक पर 70 लाख रुपए के गबन का आरोप लगा है. आरोप है कि निदेशक ने मनमर्जी से स्कूल में अपनी पत्नी समेत अन्य स्टाफ को नौकरी पर रखा और उनके एटीएम कार्ड अपने पास रख लिए. साथ ही स्कूल में कई फर्जी बिल लगाकर पैसे हड़पने का आरोप है. अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर कोतवाली पटेल नगर में निदेशक और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है.
जानकारी के अनुसार मुंजाल एस्टेट रामगढ़ शीशमबाड़ा शिमला बायपास पर स्थित दून युधिष्ठिर पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष युधिष्ठिर कुमार मुंजाल ने कोतवाली पटेल नगर में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा है कि उन्होंने राजीव सिंघल को साल 2022 में निदेशक नियुक्त किया था. उनका कार्य संस्था का संचालन करना, कर्मचारियों का वेतन बनाना और अध्यक्ष से अनुमति प्राप्त कर उनके हस्ताक्षर के चेक से सभी कर्मचारियों का वेतन उनके खातों में ट्रांसफर करना था.
साल 2022 में मुंजाल का स्वास्थ्य खराब हो गया, जिस कारण वह चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती हुए. दोनों आंखों का ऑपरेशन कराया. इसके बाद अगस्त 2022 में गंभीर बीमारी के चलते उन्होंने राजीव गांधी कैंसर अस्पताल नई दिल्ली में इलाज कराया. स्वास्थ्य लाभ पाने में उन्हें लगभग डेढ़ साल का समय लग गया. इस कारण वह अपनी संस्था में जाकर वित्तीय लेखा-जोखा नहीं देख पाए.
वापस लौटने पर उन्हें पता चला कि राजीव सिंघल ने स्कूल में पढ़ रहे बच्चों, उनके माता-पिता, अध्यापकों और संस्था से जुड़े अन्य लोगों को खुद को संस्था में भागीदार बताया. जून 2026 में उन्होंने वित्त एवं प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच की, तो पता चला कि निदेशक ने आलोक शर्मा, दीपा भटनागर, मान्या, रमा सिंघल, पंकज, खुशी, आशीष सिंह और राजकुमार यादव को नौकरी पर रखा. उन्हें 57 लाख 66 हजार रुपए संस्था के खाते से वेतन अदा किया गया. स्टाफ में निदेशक राजीव सिंघल की पत्नी रमा सिंघल भी शामिल है, जिसे 50 हजार रुपए मासिक वेतन पर रखा गया था. राजीव सिंघल से नियुक्ति आदेश, हाजिरी रजिस्टर और सेवा डीटेल की जानकारी मांगे तो उपलब्ध नहीं कर पाया.