केदारनाथ धाम यात्रा में विगत दो-तीन दिन से घोड़ा-खच्चरों में बढ़ रहे संक्रमण के चलते घोड़ा-खच्चरों का संचालन बंद किया गया है. दरअसल, इक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के चलते पशुपालन विभाग की ओर से घोड़े-खच्चरों को आराम दिया गया है. जिसके बाद यात्रा मार्ग पर डंडी-कंडी और पिट्ठू संचालकों ने मोर्चा संभाल लिया है. केदारनाथ यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को धाम ले जाने से लेकर खाद्य एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति यही लोग कर रहे हैं.
बता दें कि, यात्रा के लिए 7000 डंडी कंडी और पिट्ठू संचालक पंजीकृत हैं. इनकी मदद से हर दिन करीब 1200 श्रद्धालुओं को धाम पहुंचाया जा रहा है. जबकि लगभग एक हजार डंडी-कंडी व पिट्ठू संचालक खाद्य एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति में जुटे हुए हैं. धाम पहुंच रहे यात्रियों खासकर वृद्ध व असमर्थ श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन प्रतिदिन 800 से 1000 डंडी एवं कंडी की सुविधा उपलब्ध कर रहा है.
अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत रुद्रप्रयाग संजय कुमार ने बताया कि केदारनाथ में गौरीकुंड से आवश्यक खाद्य सामग्री सहित अन्य आवश्यक सामग्री के लिए 1000 डंडी एवं कंडी मजदूरों के माध्यम से पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है. वर्तमान में जिला पंचायत द्वारा 20 अलग-अलग स्थानों में डंडी-कंडी संचालकों द्वारा यात्रा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई जा रही है.