उत्तराखंड सरकार ने तबादला सत्र 2026 के दौरान कर्मचारी हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्थानांतरण नियमों में कई अहम संशोधन किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब महिला कर्मचारियों को सास-ससुर की गंभीर बीमारी की स्थिति में भी अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण की सुविधा मिल सकेगी। सरकार के इस फैसले को महिला कार्मिकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मुख्य सचिव समिति की बैठक में विभिन्न संशोधन प्रस्तावों पर विचार किया गया था। समिति की सहमति और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इन बदलावों को औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इस संबंध में अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत ने आदेश जारी किए हैं।
अब तक स्थानांतरण संबंधी नियमों में महिला कर्मचारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में अनुरोध आधारित तबादले का लाभ दिया जाता था। संशोधित व्यवस्था के तहत सास या ससुर की गंभीर बीमारी को भी स्थानांतरण के लिए मान्य आधार माना गया है। इससे उन महिला कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने परिवार के निकट रहने की आवश्यकता होती है।
सरकार ने समूह ‘ग’ के लिपिकीय एवं गैर-प्रशासनिक कर्मचारियों और समूह ‘घ’ कार्मिकों के लिए गृह जनपद एवं गृह स्थान की परिभाषा भी स्पष्ट कर दी है. नए नियमों के अनुसार इन श्रेणियों के कर्मचारियों की तैनाती केवल गृह जनपद के आधार पर नहीं बल्कि गृह स्थान की अवधारणा के अनुसार की जाएगी। गृह स्थान का अर्थ कर्मचारी के मूल निवास क्षेत्र से होगा, जिसमें उसका गांव, हल्का या संबंधित तहसील शामिल होगी। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों को अपने मूल क्षेत्र के अधिक निकट तैनाती का अवसर मिल सकेगा।