दून बार एसोसिएशन बनाम डीएम विवाद, रेवेन्यू-रजिस्ट्री के बाद सिविल कोर्ट में भी हड़ताल


दून बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा के खिलाफ जिलाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई से अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी है. रेवेन्यू, रजिस्ट्री से संबंधित कार्यों के बहिष्कार के बाद अब सिविल कोर्ट के कार्यों से भी अधिवक्ताओं ने मुंह मोड़ लिया है. इससे कोर्ट आने वाले फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है. एसोसिएशन ने बैठक कर निर्णय लिया है कि जब तक मुख्यमंत्री से वार्ता नहीं होती, तब तक जिलाधिकारी न्यायालय का पूर्ण रूप से बहिष्कार रहेगा.

बार एसोसिएशन का कहना है कि, जिलाधिकारी देहरादून के अधीन आने वाले राजस्व न्यायालय और तहसील में भ्रष्टाचार व्याप्त है. तहसील में दाखिल खारिज, विरासत आदि की पत्रावलियां जो कई महीनो से लंबित है और राजस्व न्यायालयों जिसमें एडीएम (एफ) आदि में सुनवाई के लिए कोई समय नियत नहीं है, उस पर जिलाधिकारी देहरादून द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

गौर है कि 4 अप्रैल को देहरादून बार एसोसिएशन ने बैठक कर निर्णय लिया था कि जिलाधिकारी देहरादून के जिला देहरादून से ट्रांसफर होने तक जिलाधिकारी न्यायालय का पूर्ण रूप से बहिष्कार और 7 अप्रैल तक राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाता है. जिसके बाद एसोसिएशन की बैठक दोबारा हुई और निर्णय लिया गया है कि जब तक मुख्यमंत्री से वार्ता नहीं होती तब तक पूरी तरह से सभी अधिवक्ता हड़ताल पर रहेंगे.

दरअसल, 25 मार्च को कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में मैसेज दून वैली बनाम सरकार वाद की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने न्यायालय की कार्रवाई पर टिप्पणियां की थी. जिला मजिस्ट्रेट ने इसे न्यायालय की गरिमा के प्रतिकूल और पेशेवर आचरण के गंभीर उल्लंघन के रूप में दर्ज किया है. प्रशासन में प्रकरण को प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की श्रेणी में रखते हुए अनुशासन समिति को संस्तुति की है. जांच अवधि के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के प्रैक्टिस अधिकारों के निलंबन पर विचार का अनुरोध किया है.

जिलाधिकारी की कार्रवाई पर देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुकरेती ने कहा कि, प्रेमचंद शर्मा बार एसोसिएशन के सात बार अध्यक्ष रह चुके हैं और बार चैंबर समिति के अध्यक्ष भी हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से यदि कोई टिप्पणी की थी तो जिलाधिकारी को इसकी सूचना बार एसोसिएशन को दी जानी चाहिए थी.








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