हरिद्वार जनपद में एक दर्दनाक घटना में ग्राम पंजाबी धर्मशाला निवासी श्री लखन शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। घटना 03 दिसम्बर 2025 की शाम घटित हुई, जब लखन शर्मा अपनी माता के साथ घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक स्थिति बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल हरिद्वार इलाज हेतु लाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सीय लापरवाही के कारण समय पर उपचार न मिलने से उनकी मृत्यु हुई।
परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम के बावजूद कई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय तथ्य स्पष्ट नहीं किए गए। 06 दिसम्बर 2025 को शरीर को पोस्टमार्टम हेतु पुनः भेजा गया, जिसके बाद मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। परिजनों का कहना है कि जब शरीर गांव लाया गया, तो स्थिति देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया। मृतक के सिर और आंख के पास गहरे निशान मिले। आरोप लगाया गया कि आंख बाहर निकली हुई थी और शरीर पर चोटों के अनेक निशान थे, जो घटना की गंभीरता और संदिग्ध परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
पीड़ित पक्ष ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल हरिद्वार द्वारा लापरवाही बरती गई। मृतक के शव को बिना सही प्रक्रिया के फ्रीजर में रखा गया और कई घंटे तक परिजनों से छिपाया गया। परिजनों को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस दौरान परिजनों की ओर से कई बार अधिकारियों और विभाग को संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उचित कार्यवाही नहीं की गई।


पीड़ित परिवार और स्थानीय सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि इस घटना में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की गंभीर चूक सामने आई है। मृतक के परिजनों द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या चिकित्सक की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, अस्पतालों की निगरानी सुनिश्चित की जाए और मानवाधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जाए।