हरिद्वार जिले के रुड़की में देहरादून से आई एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की टीम ने भाजपा पार्षद को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि पार्षद ने कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि के साथ मिलकर एक महिला और उसके परिवार को डरा धमकाकर उसके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन बेचने की साजिश की. इसी के साथ अन्य जमीनों के भी फर्जी कागजात तैयार कर बेचने की एसटीएफ की जांच में पुष्टि हुई है.
एसटीएफ ने पार्षद के खिलाफ गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया है और पार्षद को अपने साथ देहरादून ले गई. उधर मामला संज्ञान में आने के बाद भाजपा ने पार्षद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. दरअसल, 27 अगस्त बुधवार देर शाम देहरादून से एसटीएफ की टीम रुड़की पहुंची.
इसके बाद भाजपा पार्षद मनीष बोलर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. हालांकि, मनीष बोलर की गिरफ्तारी की खबर सुनकर वाल्मीकि समाज के लोग काफी संख्या में गंगनहर कोतवाली के बाहर जमा रहे, देर रात तक उनकी भीड़ कोतवाली के बाहर जमा रही.
पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेजा गया. वहीं पार्षद से की गई पूछताछ के बाद एसटीएफ निरीक्षक नंद किशोर भट्ट ने गंगनहर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी. तहरीर में बताया गया कि उन्हें शिकायती पत्र मिला था जिसमें रुड़की के रामनगर स्थित नई वाल्मीकि बस्ती में रहने वाले कुख्यात बदमाश प्रवीण वाल्मीकि के रिश्तेदार (भतीजे) मनीष बोलर (वर्तमान में भाजपा पार्षद) और उसके अन्य सहयोगी राजकुमार व अंकित के खिलाफ आरोप लगाए गए थे.
प्रवीण वाल्मीकि और मनीष बोलर ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक महिला को रेखा के रूप में दिखाया. इसके बाद रेखा के पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर फर्जी महिला के जरिए एक पावर ऑफ अटॉर्नी प्रवीण वाल्मीकि और मनीष बोलर के नजदीकी जानकार पंकज कुमार अष्टवाल निवासी ग्राम सुनहरा के नाम बनवाई गई. इसके बाद इस पावर ऑफ अटॉर्नी से दो प्लॉट बेचे गए.