यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के केंद्रीय आह्वान के तहत आज देहरादून में PNB, एस्ले हॉल के निकट बैंकर्स द्वारा केंद्र सरकार एवं Department of Financial Services (DFS) की बैंकिंग क्षेत्र के प्रति भेदभावपूर्ण नीतियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया।
यू. एफ. बी. यू. के संयोजक काॅमरेड इन्द्र सिंह रावत जी ने बताया कि आज पूरे देश भर में बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा पांच दिवसीय बैंकिंग एवं पी. एल. आई.की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
आज देहरादून में हो रहे प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विभिन्न बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया और पाँच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, PLI में समानता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा बैंक कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए UFBU के संयोजक श्री इंद्र सिंह रावत ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बैंकर्स लगातार देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद बैंकिंग क्षेत्र की जायज़ एवं लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पाँच दिवसीय बैंकिंग की प्रतिबद्धता को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए तथा PLI में किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर श्री इंद्र सिंह रावत श्री कमल तोमर, श्री अनिल जैन, श्री सी. के. जोशी, श्री एन. एस. राणा, श्री प्रवीण कुमार, श्री शद्रुल ढौंडियाल, श्री आर पी शर्मा, श्री अनिल बिष्ट, श्री मयंक, श्री विनय शर्मा, श्री हरविंदर , श्री राजन पुंडीर, श्री गोपाल तोमर, श्री के के शर्मा सहित विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों एवं साथियों ने अपने विचार रखे और सरकार की नीतियों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और UFBU के बैनर तले सभी घटक संगठन एकजुट होकर अपनी जायज़ मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रदर्शन के दौरान बैंकर्स ने जोरदार नारे लगाते हुए सरकार एवं DFS से मांग की कि पाँच दिवसीय बैंकिंग को शीघ्र लागू किया जाए, PLI में व्याप्त असमानता एवं भेदभाव को समाप्त किया जाए तथा बैंक कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन देहरादून के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की जाती है, तो केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार आंदोलन को आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रखा जाएगा।