उत्तराखंड राज्य के पुलिस कर्मचारीयो की स्थिति को देखते हुए हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ,कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट ,चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत, आयुष जायसवाल LLB अध्यनरत, शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार देहरादून और पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को पुलिस कर्मियों के लिए सम्मानजनक रैंक कल्याण योजना के लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है जिसमें यह मांग की गई है की उत्तराखंड राज्य में पुलिस में किसी भी अधिकारी की 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति होती है जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए मूल नियमों और प्रावधानों में निर्धारित है लेकिन कोई व्यक्ति अपने जीवन के लगभग 60 वर्ष सेवा में देने के बाद भी बहुत निम्न पद जैसे हेड कांस्टेबल या ASI,SI के पद पर ही सेवानिवृत्ति हो जाता है और दशकों तक समर्पित सेवा देने के बावजूद उत्तराखंड राज्य के पुलिस के कई कर्मचारी कांस्टेबल से इंस्पेक्टर तक बिना किसी औपचारिक सम्मान या पदोन्नति के सेवानिवृत हो जाते हैं जिससे सम्मान में कमी का होना और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का पडना और अनुकूल तुलना का अभाव, साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद सीमित अवसर जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है ।प्रस्ताव में यह भी जानकारी दी गई है की सेवानिवृत्ति होने से कर्मचारियों में स्वयं को कम आंका जाता है और उपेक्षित होने की भावना उत्पन्न होती है, सम्मान की कमी से भावनात्मक तनाव पहचान की कमी और उपेक्षा की भावना पैदा होती है।

सशस्त्र बलों की तरह सम्मानजनक रैंक और औपचारिक सम्मान न मिलने से उत्तराखंड राज्य के पुलिस के सेवानिवृत कर्मियों को असमानता महसूस होती है सम्मानजनक रैंक या पहचान न होने से सेवा के बाद सामाजिक पेसेवर गतिविधियों में भाग लेने के अवसर भी कम हो जाते हैं। जिसके के लिए भदोरिया एसोसिएट ने राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को प्रस्ताव में यह भी जानकारी इस समस्या के समाधान के लिए दी है की उत्तराखंड राज्य के पुलिस के सभी सेवा निवृत्त होने वाले कर्मचारी कांस्टेबल से आईजी रैंक तक को उनकी सेवा निवृत्त की तिथि से एक माह पूर्व एक पद ऊपर का सम्मानजनक पद दिया जाए इसका कोई भी वित्तीय या पेंशन संबंधी प्रभाव नहीं होना चाहिएइसका उद्देश्य सेवा निवृत्ति कर्मियों के मनोबल गर्व और सामाजिक सम्मान को बढ़ाना है और प्रस्ताव से लाभ की जानकारी भी दी गई की इस से समर्पित सेवा को औपचारिक मान्यता प्रदान करना है.
सेवानिवृत कर्मियों की गरिमा और आत्म सम्मान को बढ़ावा मिलेगा ,उत्तराखंड राज्य के भीतर मजबूत कल्याणकारी संस्कृति का निर्माण होगा ,कर्मचारी संस्थागत सम्मान और गर्व की भावना के साथ सेवा निवृत्त हो और अपने करियर के अंत में कर्मियों की गरिमा और गर्व को बढ़ावा मिलेगा सम्मानजनक पद मिलने से सेवानिवृत कर्मियों को समझ में बेहतर पहचान मिलेगी और यह सुनिश्चित हो जाएगा की सेवानिवृत कर्मचारी गरिमा गर्व और बढ़ी हुई सामाजिक मान्यता के साथ सेवा से विदा लेंगे इन सभी सुझाव और प्रस्ताव पर राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक मांग की गई है।