उत्तराखंड में महिलाओं की मर्जी के बिना नहीं लगेगी नाइट शिफ्ट, संस्थानों को गठित करनी होगी समिति


उत्तराखंड सरकार, महिला सशक्तिकरण की दिशा में तमाम काम कर रही है, जिसके तहत जहां सरकारी नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है तो वहीं, अब दुकानों एवं प्रतिष्ठानों की ओर से महिलाओं को नाइट शिफ्ट में ड्यूटी लगाने के लिए उस महिला से सहमति लेनी होगी. इसके लिए बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड दुकानों और स्थापनों (रोजगार विनियम और सेवा शर्त) नियमावली- 2022 में शामिल करने को मंजूरी दे दी है. जिसके तहत अगर कोई महिला नाइट शिफ्ट में काम करना चाहती है, तभी उसकी नाइट शिफ्ट ड्यूटी लगाई जाएगी.

उत्तराखंड में संगठित क्षेत्र में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति साल 2022 में दी गई थी. दरअसल, 17 नवंबर 2022 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान श्रम विभाग के उत्तराखंड दुकानों और स्थापनों (रोजगार विनियम और सेवा शर्त) नियमावली- 2022 के प्रस्ताव पर मुहर लग गई थी. ताकि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ ही पुरुषों की तरह ही महिलाओं को भी समान काम के अवसर मिल सके. लेकिन ऐसा भी देखा जा रहा है कि जो महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम नहीं करना चाह रही थी, उन महिलाओं को भी जबरदस्ती नाइट शिफ्ट में काम कराया जा रहा है.

जिसको देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य की दुकानों और स्थापनों में महिला कर्मकारों को नाइट शिफ्ट (रात 9.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक) कार्य करने की सशर्त छूट दे दी है. जिसमें महिला कर्मकारों की सुरक्षा का पर्याप्त प्रावधान किया गया है. इस प्रावधान से महिला कर्मकारों को काम करने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे. साथ ही महिला कर्मकारों का आर्थिक सशक्तिकरण भी होगा. नाइट शिफ्ट में महिला कर्मकारों की ड्यूटी तभी लगाई जा सकेगी, जब महिला की ओर से इस संबंध में पूर्व में ही लिखित सहमति प्राप्त कर ली जाए. जिससे महिला कर्मकारों को पुरुष कर्मकारों के समान काम करने के मौका मिलेगा. साथ ही लैंगिक समानता की व्यवस्था भी प्रभावी होंगी.

श्रम विभाग के उत्तराखंड दुकानों और स्थापनों (रोजगार विनियम और सेवा शर्त) नियमावली- 2022 में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की छूट दे दी है. लेकिन ये छूट कुछ प्रतिबंधों के साथ लागू की गई है. जिसके तहत किसी भी संस्थान में नाइट शिफ्ट के दौरान तभी महिलाओं की ड्यूटी लगाई जाएगी, जब काम में कम से कम एक साथ तीन महिलाओं की ड्यूटी लगाई जा रही है. किसी भी संस्थान में सिर्फ एक महिला से नाइट ड्यूटी नहीं कराई जा सकेगी. महिलाओं के लिए अलग से विश्राम कक्ष बनाने होंगे. अगर महिला के साथ बच्चा है तो उसके लिए अलग से शिशु कक्ष भी बनाना होगा. साथ ही महिला शौचालय की व्यवस्था जरूरी है. इसके अलावा जिस भी संस्थान में नाइट शिफ्ट में महिलाएं काम करेंगी, उस कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए समिति गठित करना अनिवार्य होगा.








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